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बुधवार, 17 मई 2017

Meri Zindagi Kisi Aur Ki Mere Naam Ka Koi Aur Hai



Meri Zindagi Kisi Aur Ki, Mere Naam Ka Koi Aur Hai
Mera Naqsh Hai Sar-E-Aayina, Pas-E-Aayina Koi Aur Hai

Meri Dhadkanon Mein Hai Chaapsi, Ye Judaaee Bhi Hai Milaapsee
Mujhe Kya Patha, Mere Dil Batha, Mere Saath Kya Koi Aur Hai

Na Gaye Dino Ko Khabar Meri, Na Shareeke Haal Nazar Teri
Tere Desh Mein, Mere Bhesh Mein, Koi Aur Tha, Koi Aur Hai

Wo Meri Taraf Nigraan Rahe, Mera Dhyaan Jaane Kahan Rahe
Meri Aankh Mein Kai Sooraten, Mujhe Chaahta Koi Aur Hai
Album: SOMEONE SOMEWHERE
Singers: Jagjit Singh
Lyricist: Muzaffar Warsi
मेरी ज़िन्दगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है
मेरा अक्स है सर-ए-आईना, पस-ए-आइना कोई और है

मेरी धड़कनों में है चाप सी, ये जुदाई भी है मिलाप सी
मुझे क्या पता, मेरे दिल बता, मेरे साथ क्या कोई और है

न गए दिनों को ख़बर मेरी, न शरीक-ए-हाल नज़र तेरी
तेरे देस में, मेरे भेस में, कोई और था कोई और है

वो मेरी तरफ़ निगराँ रहे, मेरा ध्यान जाने कहाँ रहे
मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है

न मकाम का, न पड़ाव का, ये हयात नाम बहाव का
मिरी आरज़ू न पुकार तू, मिरा रास्ता कोई और है
एल्बम: समवन समव्हेयर
गायक: जगजीत सिंह
शायर: मुज़फ़्फ़र वारसी
Watch/Listen on youtube: Pictorial Presentation

Ab Ke Barsaat Ki Rut Aur Bhi Bhadkili Hai


Ab Ke Barsaat Ki Rut Aur Bhi Bhadkili Hai
Jishm Se Aag Nikalti Hai, Kaban Gili Hai

Sonchta Hoon Ke Ab Anjaam-e-safar Kya Hoga
Log Bhi Kaanch Ke Hain, Raah Bhi Pathrili Hai

Pehle Rag-rag Se Meri Khoon Nichoda Us'sne
Ab Ye Kehtha Hai Ke Rangat Hi Meri Peelee Hai

Mujhko Be-rang Hi Na Karde Kahin Rang Itne
Sabz Mausam Hai, Hawa Surkh, Fizaan Gili Hai
Album: SOMEONE SOMEWHERE
Singers: Chitra Singh
Lyricist: Muzaffar Warsi
अब के बरसात की रुत और भी भड़कीली है
जिस्म से आग निकलती है, क़बा गीली है

सोचता हूँ के अब अंजाम-ए-सफ़र क्या होगा
लोग भी काँच के हैं, राह भी पथरीली है

शिद्दत-ए-कर्ब में तो हँसना कर्ब है मेरा
हाथ ही सख़्त हैं ज़ंजीर कहाँ ढीली है

गर्द आँखों में सही दाग़ तो चेहरे पे नहीं
लफ़्ज़ धुँधले हैं मगर फ़िक्र तो चमकीली है

घोल देता है सम'अत में वो मीठा लहजा
किसको मालूम के ये क़िंद भी ज़हरीली है

पहले रग-रग से मेरी ख़ून निचोड़ा उसने
अब ये कहता है के रंगत ही मेरी पीली है

मुझको बे-रंग ही न करदे कहीं रंग इतने
सब्ज़ मौसम है, हवा सुर्ख़, फ़िज़ा नीली है

मेरी परवाज़ किसी को नहीं भाती तो न भाये
क्या करूँ ज़हन 'मुज़फ़्फ़र' मेरा जिबरीली है
एल्बम: समवन समव्हेयर
गायक: चित्रा सिंह
शायर: मुज़फ़्फ़र वारसी
Watch/Listen on youtube: Pictorial Presentation