कभी मुड़कर नहीं देखा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कभी मुड़कर नहीं देखा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

Jis Din Se Chala Hu Kabhi Mud Kar Nahi Dekha



Jis Din Se Chala Hun Kabhi Mud Kar Nahi Dekha;
Meine Koi Gujra Hua Manjar Nahi Dekha!

Pathar Mujhe Kehta Hai Mera Chahna Wala;
Mein Moom Hu Usne Mujhe Chu Kar Nahi Dekha!

Bewaqt Agar Jauga Sab Chauk Padenge;
Ek Umra Hui Din Mein Kabhi Ghar Nahi Dekha!

Yeh Phool Mujhe Koi Virasat Mein Mile Hai;
Tumne Mera Kaanto Bhara Bistar Nahi Dekha!
Album: Tum To Nahin Ho
Singers: Jagjit Singh
Lyricist: Bashir Badr
जिस दिन से चला हूँ कभी मुड़कर नहीं देखा;
मैंने कोई गुज़रा हुआ मन्ज़र नहीं देखा!

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला;
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा!

बेवक़्त अगर जाऊँगा सब चौंक पड़ेंगे;
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा!

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं;
तुमने मेरा काँटों-भरा बिस्तर नहीं देखा!

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा;
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा!

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है;
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा!

ख़त ऐसा लिखा है के नगीने जड़े हैं;
वो हाथ के जिसने कभी ज़ेवर नहीं देखा!

क़ातिल के तरफ़दार का कहना है कि उसने;
मक़तूल की गर्दन पे कभी सर नहीं देखा!
एल्बम: तुम तो नहीं हो
गायक: जगजीत सिंह
शायर: बशीर बद्र
Watch/Listen on youtube: Pictorial Presentation