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शनिवार, 28 जनवरी 2017

Khudaa Humko Aisi Khudaayee Na De



Khudaa Humko Aisee Khudaayee Na De
Ke Apne Siwa Kuchch Dikhaayee Na De

Khatawaar Samjhegee Duniyaan Tujhe
Ke Itnee Ziyaada Safaayee Na De

Hanso Aaj Itnaa Ke Is Shor Mein
Sada Siskiyon Ki Sunaayee Na De

Abhi To Badan Mein Lahoo Hai Bahot
Kalam Cheen Le Roshnaayee Na De

Khuda Aise Ehsaas Ka Naam Hai
Rahe Saamne Aur Dikhayee Na De
Album: Hope
Singers: Chitra Singh
Lyricist: Bashir Badr
ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे;
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे!
ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे;
अब इतनी भी ज़्यादा सफ़ाई न दे!
हँसो आज इतना कि इस शोर में;
सदा सिसकियों की सुनाई न दे!
अभी तो बदन में लहू है बहुत;
कलम छीन ले रोशनाई न दे!
मुझे अपनी चादर से यूँ ढाँप लो;
ज़मीं आसमाँ कुछ दिखाई न दे!
ग़ुलामी को बरकत समझने लगें;
असीरों को ऐसी रिहाई न दे!
मुझे ऐसी जन्नत नहीं चाहिए;
जहाँ से मदीना दिखाई न दे!
मैं अश्कों से नाम-ए-मुहम्मद लिखूँ;
क़लम छीन ले रोशनाई न दे!
ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है;
रहे सामने और दिखाई न दे!
एल्बम: होप
गायक: चित्रा सिंह
शायर: बशीर बद्र
Watch/Listen on youtube: Pictorial Presentation

गुरुवार, 7 जुलाई 2016

Khuda Humko Aisi Khudai Na De



Khudaa Humko Aisee Khudaayee Na De
Ke Apne Siwa Kuchch Dikhaayee Na De

Khatawaar Samjhegee Duniyaan Tujhe
Ke Itnee Ziyaada Safaayee Na De

Hanso Aaj Itnaa Ke Is Shor Mein
Sada Siskiyon Ki Sunaayee Na De

Abhi To Badan Mein Lahoo Hai Bahot
Kalam Cheen Le Roshnaayee Na De

Khuda Aise Ehsaas Ka Naam Hai
Rahe Saamne Aur Dikhayee Na De
Album: FAVORITS
Singer: Chitra Singh
Music: Jagjit Singh
Poet: Bashir Badr
ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे

ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे
अब इतनी भी ज़्यादा सफ़ाई न दे

हँसो आज इतना कि इस शोर में
सदा सिसकियों की सुनाई न दे

अभी तो बदन में लहू है बहुत
कलम छीन ले रोशनाई न दे

मुझे अपनी चादर से यूँ ढाँप लो
ज़मीं आसमाँ कुछ दिखाई न दे

ग़ुलामी को बरकत समझने लगें
असीरों को ऐसी रिहाई न दे

मुझे ऐसी जन्नत नहीं चाहिए
जहाँ से मदीना दिखाई न दे

मैं अश्कों से नाम-ए-मुहम्मद लिखूँ
क़लम छीन ले रोशनाई न दे

ख़ुदा ऐसे इरफ़ान का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
एल्बम: फेवरिट्स
गायक: चित्रा सिंह
संगीत: जगजीत सिंह
शायर: बशीर बद्र
Watch/Listen on youtube:
By- Chitra Singh
 By - Masood Khan, Sheelo khan
Pictorial Presentation:

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

Kabhi Yun Bhi Aa Meri Aankh Mein



Kabhi Yun Bhi Aa Meri Aankh Mein,
Ke Meri Nazar Ko Khabar Na Ho,
Mujhe Ek Raat Nawaz De,
Magar Us Ke Baad Saher Na Ho,

Who Bada Nahi Who Karim Hai,
Mujhe Yeh Shifat Bhi Ata Kare,
Tujhe Bhoolne Ki Dua Karo,
To Dua Mein Meri Asar Na Ho,

Kabhi Din Dhoop Mein Zhum Ke,
Kabhi Shab Ke Phool Ko Chum Ke,
Yuh Hi Saath Saath Chale Sada,
Kabhi Khatm Aapna Safar Na Ho,

Mere Paas Mere Habib Aa,
Jara Aur Dil Ke Karib Aa,
Tujhe Dhadhkano Me Basa Lu Mein,
Ke Bichadne Ka Kabhi Daar Na Ho
Album: FAVORITS
Singers: Jagjit Singh
Poet: Bashir Badr
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर न हो
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो

वो बड़ा रहीमो-करीम है, मुझे ये सिफ़त भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो मेरी दुआ में असर न हो

मेरे बाज़ुओं में थकी-थकी, अभी महवे- ख़्वाब है चाँदनी
न उठे सितारों की पालकी, अभी आहटों का गुज़र न हो

ये ग़ज़ल है जैसे हिरन की आँखों में पिछली रात की चाँदनी
न बुझे ख़राबे की रौशनी, कभी बे-चिराग़ ये घर न हो

कभी दिन की धूप में झूम कर, कभी शब के फूल को चूम कर
यूँ ही साथ-साथ चले सदा, कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो

मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के करीब आ
तुझे धड़कनों में बसा लूँ मैं, कि बिछड़ने का कभी डर न हो
एल्बम: फेवरिट्स
गायक: जगजीत सिंह
शायर: बशीर बद्र
Watch/Listen on youtube:
 Pictorial Presentation: