बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

Zindagi Se Badi Saza Hi Nahin



Zindagi Say Badi Saza Hi Nahin
Aur Kya Jurm Hai Pata Hi Nahin

Itne Hisson Mein Bat Gaya Hoon Main
Meray Hisay Mein Kuch Bacha Hi Nahin

Sach Ghatay Ya Badey To Sach Na Rahey
Jhooth Ki Koi Intehaa Hi Nahin

Jad Do Chaandi Mein Chahey Sonay Mein
Aaiana Jhooth Bolta Hi Nahin
Album: MIRAJE
Singers: Jagjit Singh
Lyricist: Krishna Bihari Noor
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं;
और क्या जुर्म है पता ही नहीं!
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं;
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं!
सच घटे या बढ़े तो सच न रहे;
झूठ की कोई इंतहा ही नहीं!
जड़ दो चाँदी में चाहे सोने में;
आईना झूठ बोलता ही नहीं!
ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है;
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं!
ज़िन्दगी! अब बता कहाँ जाएँ;
ज़हर बाज़ार में मिला ही नहीं!
जिसके कारण फ़साद होते हैं;
उसका कोई अता-पता ही नहीं!
धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून;
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं!
कैसे अवतार कैसे पैग़म्बर;
ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नहीं!
उसका मिल जाना क्या, न मिलना क्या;
ख़्वाब-दर-ख़्वाब कुछ मज़ा ही नहीं!
अपनी रचनाओं में वो ज़िन्दा है;
‘नूर’ संसार से गया ही नहीं!
एल्बम: मिराज
गायक: जगजीत सिंह
शायर: कृष्ण बिहारी नूर
Watch/Listen on youtube: Pictorial Presentation