बुधवार, 17 मई 2017

Dil Hi To Hai Na Sang-o-khisht Dard Se Bhar Na Aaye Kyun



Dil Hii To Hai Na Sa.ng-o-khisht Dard Se Bhar Na Aaye Kyuu.n
Roe.nge Ham Hazaar Baar Koii Hame.n Sataaye Kyuu.n

Dair Nahii.n Haram Nahii.n Dar Nahii.n Aastaa.n Nahii.n
Baithe Hai.n Rahaguzar Pe Ham Gair Hame.n Uthaaye Kyuu.n

Qaid-e-hayaat-o-band-e-gam Asl Me.n Dono.n Ek Hai.n
Maut Se Pahale Aadamii Gam Se Najaat Paaye Kyuu.n

Haa.n Vo Nahii.n Khudaaparast, Jaao Vo Bevafaa Sahii
Jisako Ho Diin-o-dil Aziiz, Usakii Galii Me.n Jaaye Kyuu.n

"Ghalib"-e-khastaa Ke Bagair Kaun Se Kaam Band Hai.n
Roiie Zaar-zaar Kyaa, Kiijie Haaye-haaye Kyuu.n
Album: SOMEONE SOMEWHERE
Singers: Jagjit Singh
Lyricist: Mirza Ghalib
दिल ही तो है, न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों
रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों

दैर नहीं, हरम नहीं, दर नहीं, आस्ताँ नहीं
बैठे हैं रहगुज़र प हम, ग़ैर हमें उठाए क्यों

जब वह जमाल-ए-दिल फ़रोज़, सूरत-ए-मेहर-ए-नीमरोज़
आप ही हो नज़ार:-सोज़, पर्दे में मुंह छुपाए क्यों

दश्न:-ए-ग़मज़:, जाँ सिताँ नावुक-ए-नाज़ बे पनाह
तेरा ही `अक्स-ए-रुख़ सही, सामने तेरे आए क्यों

क़ैद-ए-हयात-ओ-बन्द-ए-ग़म, अस्ल में दोनों एक हैं
मौत से पहले, आदमी ग़म से निजात पाए क्यों

हुस्न और उस प हुस्न-ए-ज़न, रह गई बुलहवस की शर्म
अपने प ए`तिमाद है, और को आज़माए क्यों

वाँ वह ग़ुरूर-ए-`इज़्ज़-ओ-नाज़, याँ यह हिजाब-ए-पास-ए-वज़`
राह में हम मिलें कहाँ, बज़्म में वह बुलाए क्यों

हाँ वह नहीं ख़ुदा परस्त, जाओ वह बेवफ़ा सही
जिस को हो दीन-ओ-दिल `अज़ीज़, उस की गली में जाए क्यों

ग़ालिब-ए-ख़स्त: के बग़ैर, कौन-से काम बन्द हैं
रोइये ज़ार ज़ार क्या, कीजिये हाय हाय क्यों
एल्बम: समवन समव्हेयर
गायक: जगजीत सिंह
शायर: मिर्ज़ा ग़ालिब
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By - Shafqat Amanat Ali Khan